Friday, 24 November 2017



नींद, कर्म और मन 


               हमें नींद क्यों आती है ? वैज्ञानिक कहते हैं कि जब शरीर काम करके थक जाता है तो हमें नींद आ जाती है | हम जब उठते हैं तो तरोताजा हो कर उठते हैं | जब जागते हैं तो हमारी बुद्धि हमें बताती रहती है कि ये नहीं करना, वो नहीं करना , इसे ऐसे नहीं करना, इसको ऐसे करना इत्यादि | सो जाने पर हमारी बुद्धि भी विकल हो जाती है | हमें पता ही नहीं चलता कि हमारी टांग कहाँ पर है और हमारे हाथ कहाँ पर हैं और हमारा शरीर कहाँ पर किस अवस्था में है | 



ऐसे समय में मन स्वतंत्र हो जाता है , वो जो देखना चाहता है वही देख लेता है | किसी की मार – पिटाई करनी हो तो मार – पीट के आ जाता है और किसी को प्यार वगैराह कुछ करना हो तो प्यार कर के आ जाता है | इसलिए जो बात जागने में संभव नहीं हो पाती वो बात सो जाने पर एक तरह से पूरी हो जाती है | यह एक तरह के सपने हैं | अगर किसी विषय के बारे में चिंता है मन में कि इसका क्या होगा, कैसे होगा तो हम नींद में भटकेंगे, हमें रास्ता नहीं मिलेगा, हमारी ट्रेन छूट जाएगी और अगर हम आनन्दित हैं किसी विषय को लेकर तो नींद में हम मित्रों की महफिल में बैठे हुए होंगे, परिवार में बेठे हुए होंगे, ठहाके लग रहे होंगे और आनन्द ही आनन्द होगा | ये सब मन के कारण होता है | 


                मन को हम जितना शुद्ध करेंगे उतना ही सो जाने पर हम शुद्ध चीज को देखेंगे | मन को शुद्ध कैसे करें ? तो यह जागने पर विचारों को शुद्ध करने से होगा | जब किसी व्यक्ति के बारे में कोई विचार उठे तो वो धनात्मक ही उठे | हमारे लिए लाख किसी व्यक्ति ने गलत काम किए हों लेकिन हमारे मन में उसके प्रति कोई गलत भाव न आए तो हमारे विचार भी सही होंगे | ये काम जरा कठिन है, मगर हम इस दिशा में प्रयास कर के सफलता प्राप्त कर सकते हैं | प्रार्थना को नियमित करना इसका सरल उपाय है | हमारे विचार ही हमारे बोल बनते हैं, और हमारे बोल ही हमारे कृत्य बनते हैं | ये तीनों चीजे विचार, बोल और कृत्य, हमारे कर्म कहलाते हैं | हमारे कर्मों को धनात्मक दिशा देना मन को शुद्ध करना है | मन को शुद्ध करने के बाद हम सपने भी शद्ध ही देखेंगे | वो सपने देखेंगे, जो समय से पहले ही देख लें और जो सच हो जाएं | ऐसा कैसे होता है कि हम वो सभी कुछ जो अभी तक नहीं हुआ स्पष्ट देख लेते हैं ? तो यह आगे की बात है और यह होना भी कोई अचरज की बात नहीं | प्रार्थना में चलते चलते एक बिंदु आता है जब यह सम्भव हो जाता है | हालांकि नींद भी एक अवस्था है, इससे आगे सुषुप्ति है और इससे आगे तुरीया की स्थिति है, ऐसा सनातन धर्म में कहा गया है |


              कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें नींद नहीं आती, वे सिर्फ आराम करते हैं और उनके आस पास उन्हें सब पता होता है कि कहाँ पर क्या हो रहा है | फिर उन्हें सपने भी नहीं आते | सपनों का नींद से ही सम्बन्ध है और नींद में जाने पर पूर्णतया मन का साम्राज्य चलता है | जो कभी सोया ही नहीं उस पर मन का साम्राज्य नहीं चलता | मन उनके अनुसार चलता है, वे मन के अनुसार नहीं चलते | वैसे मन के शुद्ध हो जाने पर हमारे विचार, हमारे बोल और हमारे कृत्य तीनों शुद्ध हो जाते हैं | हमें तब स्वप्न भी सुस्वप्न आते हैं, लेकिन पंहुचे हुए लोग कहते हैं कि – जब जाग रहे हैं तो भी ये सपना देख रहे हैं , असल में वे जागृति की बात कर रहे हैं | जो पूर्णतः जागृति की अवस्था में है उन्हें सपने नहीं आते और उनके कर्म भी जागृत होते हैं | 
 के.बी.व्यास