जोधपुर यात्रा वृतांत (५ भागों की श्रंखला का भाग-२)
अदभुद संयोंगो के कारण दो बार टलते हुए, आखिर अंत में, बिना किसी अडचन के, अन्जाने में ही अपने आप पहले नवरात्रे के दिन, ११ अप्रेल गुरूवार को, नव वर्ष के उपलक्ष्य में, हंसराज जी महाराज के सेखाळा गांव के आश्रम जाने का कार्यक्रम तय हो गया.
डा.महेश चन्द्र व्यास जी की कार में, अरूण व्यास और सी.एस.पुरोहित प्रभु के साथ, जैसलमेर रोड पर बने गांव सेखाळा की ओर यात्रा सुबह सुबह शुरू हो गई.
हंसराज जी महाराज के दर्शन और उनका सानिध्य सदैव एक अदभुत अनुभव हुआ करता है, बहुत सी बातें हर बार ऎसी होतीं हैं जो मिस्टिक होती हैं.


इस बार भी कुछ ऎसा ही हुआ. आश्रम में पहुंचते ही उनकी सौम्य मुस्कुराहट और आशीर्वाद ने ह्रदय भिगो दिया. हम सभी बैठ गए और पहले थोडी इधर उधर की बात कर के,हंसराज जी महाराज ने डेमोक्रेसी पर बोलना आरंभ किया, बहुत गहरे और अनूठे प्रयोगों के बारे जानकारी दी, कि किस तरह से एक बार एन आर आई युवाओं ने भारत का भाग्य बदलने की ठानी और तमिलनाडू में कुछ सीटें भी जीती. विश्व के विभिन्न देशों की राजनीति में क्या होता है? असल डेमोक्रेसी क्या है?
समाज एक नेता चुनता है फ़िर वे नेता कैसे अपने संकल्पों से बदल जाते हैं? आधुनिक विज्ञान की दिशा, ब्रह्मांड, ईथर,वारेन बफ़ेट,माइक्रो एटम, सिद्धों की परम्परा,मनोविज्ञान,चिकित्सा शास्त्र, सूक्ष्म शरीर का अस्तित्व और उसके गुण, आदि विषयों पर पहले बहुत कुछ सुना था उनसे, लेकिन डेमोक्रेसी-राजनीति जैसे विषय पर मैं पहली बार उनके श्री मुख से कुछ सुन रहा था. शायद उन्हे आभास हो गया था कि रास्ते में हम लोग पुष्करणा एकता और हमारे समाज से एक एम पी के टिकट की राजनैतिक चर्चा कर रहे थे.अजीब संयोग था यह.

पिछली एक भैंट के दौरान मैने उनसे कहा था " आप तो हज़ारों लोगों ने ज्ञान देवो सा, मने भी थोडो ज्ञान दे दो ताकि म्हारो भी कुछ भलो हु जा" उन्हौने हंस के उत्तर दिया "ज्ञान तो ऎडो हूवणों चईजे जिण सूं कोई फ़ायदो व्है, तू यूं कर सुबह ४ बजियों ऊठ ने नहा लिया कर" मेरी गाडी इस पहले पाठ पर ही अभी तक प्रयास रत है. तो इस बार की भैंट में राजनीति की चर्चा के बाद उन्हौंने विषय बदला और पुनः सुबह ४ बजे उठ कर नहा लेने के प्रभाव की चर्चा की, लेकिन इस बार थोडे विस्तार में.
उन्हौंने कहा " सुबह चार बजियों ऊठ ने नहा लेवण सूं एक आंतरिक परिवर्तन आया करे, जिना अनेकों अनेक लाभ हैं,...मतलब अपे होच नहीं सको वैडा लाभ है.जीवन मूल धरातल माते सुखद हूवण लाग जा, क्यूं कि अप्पे प्रकृति रे साथे हार्मनी में आ जाओं, सारी समस्याओं और दुःख प्रकृति रे साथे डिस-हार्मनी री वजह सूं आया करे" फ़िर उन्हौंने "एक" दिन की प्रकृति के बारे में बताया कि "सुबह ४ बजियों सूं १० बजियों तक रौ समय सात्विक गुण वाळो हुया करे,जिको ४ बजियों सूं आरंभ हू ने पहला तीन घंटे तक चढाव माते व्है और बाद में उतार माते व्है. पछे सुबह १० बजियों सूं शाम ४ बजियों तक रौ समय राजसिक गुण वाळौ व्है, जिको भी तीन घंटे चढाव पछे तीन घंटे उतार माते व्है, उन्ने पछे शाम ४ बजियों सूं रात १० बजियों तक रौ समय तामसिक गुणों वाळो व्है और औ भी तीन तीन घंटे रे चढाव उतार वाळो हुया करे. उन्ने बाद रात १० बजियों सूं सुबह ४ बजियों तक प्रकृति, आपरी तुरीय अवस्था में पाछी पूग जावे, याने खुद री मूल अवस्था में चली जावे, जिने आनंद री अवस्था भी कैया करे, जदै आ तुरीय अवस्था टूटे तो पुनः तीन गुणों में विभक्त हू ने बाकी रे १८ घंटो में बराबर बंट जावे. इण वास्ते सुबह ४ बजियों ऊठ ने नहा लेवण सूं जीवन में कई ऎसी बातों घटित हूवण लाग जा, ज्यों ने सामन्य तौर माते हमजाउण सूं संभवतः हमझ में नहीं आवे." आगे उन्हौंने कहा "अगर एक दिन ने ढंग सूं जी्वणो आ जा तो पूरौ जीवन ढंग सूं, पूरी हार्मनी रे सा्थे जियो जा सके, और एक दिन में भी अगर, उण दिन री सुबह ढंग सू जी लौं तौ पूरो दिन ढंग सू जियो जा सके"
इन सारी बातों के बाद आश्रम के खेत में श्रमदान कर के, प्रसादी ले कर हम पुनः जोधपुर की ओर निकल पडे.
सी.एस.पुरोहित प्रभु को लगा जैसे, सामाजिक, राजनैतिक और हर एक बात केवल उनके लिए ही कही जा रही हो. अरूण व्यास और डा. महेश जी व्यास प्रभु को भी आनंद आया. मुझे भी हर बार मेरे मन में उठते प्रश्नों का बिना पूछे उत्तर मिलता है, इस बार मेरे मन में चल रहे सामाजिक राजनैतिक मंथन से उपजे प्रश्नों का बिना पूछे उत्तर मिला और इस विषय पर दिशा मिली. इस बार की जोधपुर यात्रा में ऎसा आध्यात्मिक प्रसाद मिलना बहुत आनंददायक था,
और अभी तक यह बात दिल में गहरे उतरी हुई है कि "अगर एक दिन ने ढंग सूं जी्वणो आ जा तो पूरौ जीवन ढंग सूं, पूरी हार्मनी रे साथे जियो जा सके, और एक दिन में भी अगर, उण दिन री सुबह ढंग सू जी लौं तौ पूरो दिन ढंग सू जियो जा सके"
अदभुद संयोंगो के कारण दो बार टलते हुए, आखिर अंत में, बिना किसी अडचन के, अन्जाने में ही अपने आप पहले नवरात्रे के दिन, ११ अप्रेल गुरूवार को, नव वर्ष के उपलक्ष्य में, हंसराज जी महाराज के सेखाळा गांव के आश्रम जाने का कार्यक्रम तय हो गया.
डा.महेश चन्द्र व्यास जी की कार में, अरूण व्यास और सी.एस.पुरोहित प्रभु के साथ, जैसलमेर रोड पर बने गांव सेखाळा की ओर यात्रा सुबह सुबह शुरू हो गई.
हंसराज जी महाराज के दर्शन और उनका सानिध्य सदैव एक अदभुत अनुभव हुआ करता है, बहुत सी बातें हर बार ऎसी होतीं हैं जो मिस्टिक होती हैं.
इस बार भी कुछ ऎसा ही हुआ. आश्रम में पहुंचते ही उनकी सौम्य मुस्कुराहट और आशीर्वाद ने ह्रदय भिगो दिया. हम सभी बैठ गए और पहले थोडी इधर उधर की बात कर के,हंसराज जी महाराज ने डेमोक्रेसी पर बोलना आरंभ किया, बहुत गहरे और अनूठे प्रयोगों के बारे जानकारी दी, कि किस तरह से एक बार एन आर आई युवाओं ने भारत का भाग्य बदलने की ठानी और तमिलनाडू में कुछ सीटें भी जीती. विश्व के विभिन्न देशों की राजनीति में क्या होता है? असल डेमोक्रेसी क्या है?
समाज एक नेता चुनता है फ़िर वे नेता कैसे अपने संकल्पों से बदल जाते हैं? आधुनिक विज्ञान की दिशा, ब्रह्मांड, ईथर,वारेन बफ़ेट,माइक्रो एटम, सिद्धों की परम्परा,मनोविज्ञान,चिकित्सा शास्त्र, सूक्ष्म शरीर का अस्तित्व और उसके गुण, आदि विषयों पर पहले बहुत कुछ सुना था उनसे, लेकिन डेमोक्रेसी-राजनीति जैसे विषय पर मैं पहली बार उनके श्री मुख से कुछ सुन रहा था. शायद उन्हे आभास हो गया था कि रास्ते में हम लोग पुष्करणा एकता और हमारे समाज से एक एम पी के टिकट की राजनैतिक चर्चा कर रहे थे.अजीब संयोग था यह.
पिछली एक भैंट के दौरान मैने उनसे कहा था " आप तो हज़ारों लोगों ने ज्ञान देवो सा, मने भी थोडो ज्ञान दे दो ताकि म्हारो भी कुछ भलो हु जा" उन्हौने हंस के उत्तर दिया "ज्ञान तो ऎडो हूवणों चईजे जिण सूं कोई फ़ायदो व्है, तू यूं कर सुबह ४ बजियों ऊठ ने नहा लिया कर" मेरी गाडी इस पहले पाठ पर ही अभी तक प्रयास रत है. तो इस बार की भैंट में राजनीति की चर्चा के बाद उन्हौंने विषय बदला और पुनः सुबह ४ बजे उठ कर नहा लेने के प्रभाव की चर्चा की, लेकिन इस बार थोडे विस्तार में.
उन्हौंने कहा " सुबह चार बजियों ऊठ ने नहा लेवण सूं एक आंतरिक परिवर्तन आया करे, जिना अनेकों अनेक लाभ हैं,...मतलब अपे होच नहीं सको वैडा लाभ है.जीवन मूल धरातल माते सुखद हूवण लाग जा, क्यूं कि अप्पे प्रकृति रे साथे हार्मनी में आ जाओं, सारी समस्याओं और दुःख प्रकृति रे साथे डिस-हार्मनी री वजह सूं आया करे" फ़िर उन्हौंने "एक" दिन की प्रकृति के बारे में बताया कि "सुबह ४ बजियों सूं १० बजियों तक रौ समय सात्विक गुण वाळो हुया करे,जिको ४ बजियों सूं आरंभ हू ने पहला तीन घंटे तक चढाव माते व्है और बाद में उतार माते व्है. पछे सुबह १० बजियों सूं शाम ४ बजियों तक रौ समय राजसिक गुण वाळौ व्है, जिको भी तीन घंटे चढाव पछे तीन घंटे उतार माते व्है, उन्ने पछे शाम ४ बजियों सूं रात १० बजियों तक रौ समय तामसिक गुणों वाळो व्है और औ भी तीन तीन घंटे रे चढाव उतार वाळो हुया करे. उन्ने बाद रात १० बजियों सूं सुबह ४ बजियों तक प्रकृति, आपरी तुरीय अवस्था में पाछी पूग जावे, याने खुद री मूल अवस्था में चली जावे, जिने आनंद री अवस्था भी कैया करे, जदै आ तुरीय अवस्था टूटे तो पुनः तीन गुणों में विभक्त हू ने बाकी रे १८ घंटो में बराबर बंट जावे. इण वास्ते सुबह ४ बजियों ऊठ ने नहा लेवण सूं जीवन में कई ऎसी बातों घटित हूवण लाग जा, ज्यों ने सामन्य तौर माते हमजाउण सूं संभवतः हमझ में नहीं आवे." आगे उन्हौंने कहा "अगर एक दिन ने ढंग सूं जी्वणो आ जा तो पूरौ जीवन ढंग सूं, पूरी हार्मनी रे सा्थे जियो जा सके, और एक दिन में भी अगर, उण दिन री सुबह ढंग सू जी लौं तौ पूरो दिन ढंग सू जियो जा सके"
इन सारी बातों के बाद आश्रम के खेत में श्रमदान कर के, प्रसादी ले कर हम पुनः जोधपुर की ओर निकल पडे.
सी.एस.पुरोहित प्रभु को लगा जैसे, सामाजिक, राजनैतिक और हर एक बात केवल उनके लिए ही कही जा रही हो. अरूण व्यास और डा. महेश जी व्यास प्रभु को भी आनंद आया. मुझे भी हर बार मेरे मन में उठते प्रश्नों का बिना पूछे उत्तर मिलता है, इस बार मेरे मन में चल रहे सामाजिक राजनैतिक मंथन से उपजे प्रश्नों का बिना पूछे उत्तर मिला और इस विषय पर दिशा मिली. इस बार की जोधपुर यात्रा में ऎसा आध्यात्मिक प्रसाद मिलना बहुत आनंददायक था,
और अभी तक यह बात दिल में गहरे उतरी हुई है कि "अगर एक दिन ने ढंग सूं जी्वणो आ जा तो पूरौ जीवन ढंग सूं, पूरी हार्मनी रे साथे जियो जा सके, और एक दिन में भी अगर, उण दिन री सुबह ढंग सू जी लौं तौ पूरो दिन ढंग सू जियो जा सके"