समय और कर्म
एक मित्र से बात हो रही थी | उन्होंने
कहा कि इस दुनिया में समय प्रधान है | उन्होंने समय की गति और समय के फेर के बारे में बताया | उन्होंने बताया की समय अगर साथ दे तो रंक,
राजा बन जाता है और समय साथ न दे तो राजा , रंक बन जाता है | मैंने कहा की मनुष्य के
कर्म प्रधान है | उसके कर्मों के अनुसार वो राजा बनता है या रंक बनता है | मनुष्य की
सारी घटनाएं उसके कर्म के हिसाब से चलती हैं | बहरहाल, बहुत रोचक वार्तालाप हुआ हमारा
|

देखा जाए तो मनुष्य के कर्म प्रधान हों
तो उस पर समय का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता, वो आंतरिक धरातल पर आनन्द में रहता है |
समय की कितनी ही आंधी आए , वो चाहे रंक बन जाए मगर वो केवल ‘वो’ रहता है और ‘वो’ बदलता नहीं, ‘वो’ केवल प्रगति की राह पर अग्रसर रहता है | यह समय केवल उसकी परीक्षा का होता
है | उसने जो मूल्य सीखे हैं उन्हें कड़ा करने का साहस आ जाए इसलिए वो संभवतया रंक बनता
है | राजा हो या रंक ये बाहरी धरातल पर घटित
होते है आंतरिक धरातल पर वो सदैव राजा ही है |
उन्होंने कहा की मैंने समय के
चक्र को देखा है और समय जब उल्टा चलता है मैंने भी उल्टे काम किए हैं और जब समय अच्छा
आया तो मैंने अच्छे काम किए हैं | वे यह बात बहुत ईमानदारी में कह गए | मैंने कहा की
इस तरह से तो आप समय के गुलाम हो गए? आप अच्छा काम करेंगे या बुरा काम करेंगे ये समय
तय करेगा ? अगर समय तय करेगा तो आप क्या करेंगे ? इस बात पर वे जवाब नहीं दे पाए मगर
उनका यही मानना था कि समय प्रधान है, और तब उन्होंने कहा “समय बड़ा बलवान” मैंने कहा
– मगर उससे भी बलवान मनुष्य का कर्म
| मनुष्य के कर्म की शक्ति को आप बहुत कम आंक रहे है | कर्म सशक्त हों तो समय की ताकत
भी फीकी पड़ जाती है |

असल में समय की गिरफ्त में वही रहता
है जिसके जीवन में गुरु नहीं | गुरु आ जाए तो समय भी मनुष्य के हिसाब से चलता है |
उल्टे समय में हम उल्टे काम करते हैं तो यह हमारे ही कर्म हैं , हमारे आंतरिक मूल्य
दृढ़ नहीं हुए होते | गुरु हमारे आंतरिक मूल्य दृढ़ करने में सहायता करते हैं और इस तरह
हम पर समय का प्रभाव नहीं चलता | समय चाहे उलटा चले या सीधा हम सीधे ही चलते हैं |
उल्टे समय में दुनिया की नजरो में हम भले ही भ्रमपूर्ण स्तिथी में आ जाएं लेकिन अपने
गुरु की दृष्टि में हम हमेशा स्पष्ट होते हैं कि हम क्या हैं और अंत में दुनिया की
नजरों में भी हम स्पष्ट हो जाते हैं | सारा का सारा खेल मनुष्य के कर्मों का है, समय
केवल परीक्षा लेता है |

के.बी. व्यास
आप इस आलेख से सहमत हों या नहीं ये आपकी स्वतंत्रता है | जिस पॉइंट पर आपकी सहमती ना हो कृपया मुझे इस बारे में मुझे अवगत करवाएं | संभव है मुझे भी मेरे विचारों को समझने में सहायता मिलेगी |
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