रिसर्च
अंग्रेजी का ये शब्द रिसर्च बड़ा मजेदार शब्द है | सर्च और रिसर्च दो शब्द हैं अंग्रेजी भाषा में | तो सर्च तो हो चुकी है अब हम रिसर्च कर रहे हैं और फिर से री –रिसर्च और फिर री री – रिसर्च करेंगे | याने घूमते रहेंगें एक ही धुरी पर और खोज खोज कर के वो ही चीज़े लाते रहेंगें, जो कभी किसी जमाने में, किसी युग में सभी के सामने आ चुकी हैं | फिर समय बदला, युग बदला और वो खोज धीरे धीरे भुला दी गई और अब उसे पुनः ज़िंदा करना होता है, इसलिए रिसर्च होती है |
यदि हम याद करें कि कौन कौन लोग हैं जो सदियों तक याद रखे जाते हैं | तो ऐसे में वो ही लोग आते हैं जिन्होंने धर्म रखा, जिन्होंने इसकी आधारशिलाएं रखी और आधारशिला तो हम कह रहे हैं, उन्होंने उन सिद्धांतों को सामने रखा जो उस समय के लोगों को मालूम ही नहीं था | हम इन्सान को याद तो करते हैं लेकिन उनका मूल उद्देश्य क्या था ये भूल जाते हैं | हम उनकी बातों को जो हमारे सामने अधूरी बन के आ रही हैं पूरा समझ कर अपना ध्येय मान लेते हैं | लोग तो याद रहते हैं मगर उनकी कही बात कहीं गुम हो जाती है, इसलिए बार बार रिसर्च करनी पड़ती है, पुनः खोज करनी पड़ती है, खोज कर सामने लाना पड़ता है | लोग इसीलिए कहते हैं जो कहा गया वो बिल्कुल नया है, जबकि उसका सिर्फ कहने का तरीका नया है मगर बात उसमें शाश्वत ही है | अहंकार इस मामले में बहुत अहम रोल अदा करता है | वो बात को सही रूप में आने से रोकता है जो कि एक आसुरी वृत्ति है |
अंग्रेजी का ये शब्द रिसर्च बड़ा मजेदार शब्द है | सर्च और रिसर्च दो शब्द हैं अंग्रेजी भाषा में | तो सर्च तो हो चुकी है अब हम रिसर्च कर रहे हैं और फिर से री –रिसर्च और फिर री री – रिसर्च करेंगे | याने घूमते रहेंगें एक ही धुरी पर और खोज खोज कर के वो ही चीज़े लाते रहेंगें, जो कभी किसी जमाने में, किसी युग में सभी के सामने आ चुकी हैं | फिर समय बदला, युग बदला और वो खोज धीरे धीरे भुला दी गई और अब उसे पुनः ज़िंदा करना होता है, इसलिए रिसर्च होती है |
यदि हम याद करें कि कौन कौन लोग हैं जो सदियों तक याद रखे जाते हैं | तो ऐसे में वो ही लोग आते हैं जिन्होंने धर्म रखा, जिन्होंने इसकी आधारशिलाएं रखी और आधारशिला तो हम कह रहे हैं, उन्होंने उन सिद्धांतों को सामने रखा जो उस समय के लोगों को मालूम ही नहीं था | हम इन्सान को याद तो करते हैं लेकिन उनका मूल उद्देश्य क्या था ये भूल जाते हैं | हम उनकी बातों को जो हमारे सामने अधूरी बन के आ रही हैं पूरा समझ कर अपना ध्येय मान लेते हैं | लोग तो याद रहते हैं मगर उनकी कही बात कहीं गुम हो जाती है, इसलिए बार बार रिसर्च करनी पड़ती है, पुनः खोज करनी पड़ती है, खोज कर सामने लाना पड़ता है | लोग इसीलिए कहते हैं जो कहा गया वो बिल्कुल नया है, जबकि उसका सिर्फ कहने का तरीका नया है मगर बात उसमें शाश्वत ही है | अहंकार इस मामले में बहुत अहम रोल अदा करता है | वो बात को सही रूप में आने से रोकता है जो कि एक आसुरी वृत्ति है |
अहंकार से निपटने के लिए मनुष्य गुरु करता है, लेकिन गुरु भी कई प्रकार के
होते हैं | असली गुरु मनुष्य को उसके भीतर प्रवेश करने में मदद करता है |
बाहरी दुनिया से भीतर की दुनिया में कदम रखवाने में मदद करता है | एक बार
मनुष्य भीतर उतरा तो उसे सभी अपने लगने लगते हैं | उसमें ‘मैं’ और ‘तुम’ का
भेद नहीं रहता | सभी ‘मैं’ हो जाता है, कोई भेद नहीं रहता |
इस दिशा में लोगों को जगाना सबसे बड़ा चैलेन्ज है | कुछ लोग हैं जो पूरे सोए हुए हैं, कुछ लोग हैं जो आधे सोए आधे जागे हुए हैं और बहुत कम ऐसे हैं जो पूर्णतया जाग गए हैं | रिसर्च आधे सोए आधे जागे लोगों के लिए है |
के.बी.व्यास
इस दिशा में लोगों को जगाना सबसे बड़ा चैलेन्ज है | कुछ लोग हैं जो पूरे सोए हुए हैं, कुछ लोग हैं जो आधे सोए आधे जागे हुए हैं और बहुत कम ऐसे हैं जो पूर्णतया जाग गए हैं | रिसर्च आधे सोए आधे जागे लोगों के लिए है |
के.बी.व्यास









छींक का इतिहास तब से है जब से नाक का इतिहास है। अगर

