Wednesday, 29 May 2013

गज़ल के हर एक लफ़्ज़ को कसम है ये कह देना
लोगों के दिलो रूह तक करना असर, ये कह देना

नेकी बदी की जंग तो हर दौर का हिस्सा रही है
ब्रह्मास्त्र है तू आज भी,बात ये कलम  से  कह देना

खुदा के वास्ते, सोच की गहराइयों को सम्हाले रखना,
डूबते हुओं को मिलेगा हौसला, ये शायरों से कह देना

बुलंदियां यूं तो अच्छी हैं,दिल को खुशियां देती हैं
मगर जो ये सर चढने लगें, इन्हें इन्कार कह देना

मतलब परस्त लोगों की बडी ये खास आदत है
पास आ के तुम्हारी हां में हां, ना में ना कह देना


के.बी.व्यास
हर अंधेरा दूर हो, दर्द की रातें सभी चकनाचूर हों
 सभी के आंगन में यारों उजली धूप खिलनी चाहिये

जोश जीने का सदा बढता रहे बढता रहे
मुश्किलों को लांघने का शौक होना चाहिये

साथ हों जब भी किसी के पास बैठे दो घडी
बात कोई यूं चले जो दिल को छूनी चाहिये

युद्ध के बादल छटें हैवानियत ये बंद हो
इंसान में इंसानियत का होश जगना चाहिये
 
रात हो तारों भरी और सुबह खुशगवार हो
मन रहे हर दम खिला उल्लास होना चाहिये

हाथ को आगे बढाएं या मिलें लग कर गले
दिल हमारे साफ़ हों और इरादे नेक होने चाहिये

ज़िंदगी कुछ यूं जिएं, काम कुछ ऐसे करें
मुड के देखें हम कभी तो फ़क्र होना चाहिये


के.बी.व्यास
इंसान को इंसान से इतना तो जुडना चाहिये
दर्द में डूबा हो कोई तो उसे कुछ स्नेह देना चाहिये

भीड में हो गर अकेला, दिल किसी का रो रहा
दो घडी रुक कर उसे फ़िर, कुछ आस देनी चाहिये

ज़िंदगी के मोड यारों, कुछ सुनहरे कुछ कठिन कमज़ोर हैं
साथ चल के दोस्त बन कर,ख्वाब बुनने चाहिये

कुछ वो कहे, कुछ हम सुनें,कुछ हम कहें कुछ वो सुनें
डोरियां रिश्तों की यारों, इस तरह मज़बूत बननी चाहिये

बात दिल की खुलकर कहॆं, बात दिल की खुलकर सुनॆं
सुनहरे एक मोड पर फिर उसका अंत होना चाहिये


के.बी.व्यास

Monday, 27 May 2013

लिकता  चंद  जी रो इन्टरव्यू


काले दोपहर रो भोजन कर ने होचियो अबे थोडी देर पौड लियो जावे,
जरे तकिए माते मथॊ टिकायों ने २-४ मिनट इ ज हुया व्हेला ने आडे री घण्टी बाज गी...
अरे यार इण टैम कुण आयो, आ होचतो होचतो मैं आडो खोलियो तो हौमे ऊबा हा.........लिकता चंद जी .

                                                                
लिकता चंद जी हाथ जोड ने बोलिया ..कई भा सा किकर ?
मैं कैयो .....लिकता  चंद जी आप और अबार ने म्हारे घरे ????
वे बोलिया मने ठा ही.... मैं थने ५० फ़ोन कर लिया हूं....मने ठा है न तो तू फ़ोन उठावेला, न पाछी कौल करेला, न म्हारो इन्टरव्यू लेवेला, जरे मैं होचियो हीदो घरे इ ज चालॊ, दोपारा खाणो खा ने तू थोडी देर हूया करे जरे मने ठा ही तू घरे मिलेला ही मिलेला.
मैं कैयो...आप वाकई लिकता चंद जी हो सा....वे चीकणा घडा व्है ज्यूं हंसता हुआ मौने आय ग्या...                                                                                               

ने सोफ़े माते बैठ ने बोलिया ...मने ठा है थारे इन्टरव्यू रो पैलो प्रश्न कई व्हैला.....वो व्हैला....लिकताई रो माहात्म्य कई है ?
मैं कैयो ..लिकता चंद जी  मैं तो की पूछियो ही कोई आपने और न पूछूं. लोग आपने चाहे कित्तो ही इशारो दे दे, आडॆ टेडे तरीके सू हमजा दे, डायरेक्ट मूंडे माते की कै देवे तौ भी आप आपरी लिकतायों नहीं छोडोला.
लिकता  चंद जी मुळक ने बोलिया...देख ऎडो है लिकताई कलयुग रो एक गुण है, लिकता पुराण में कैयोडो है..."हमजो तो अपमान नहीं हमजो तो कॊई अपमान नहीं"....ने हमें तू पूछेला म्हारा गुरू कुण है?
मैं कैयो ...मैं तो की पूछियो ही कोनी आपने और न की पूछूं.
पण लिकता चंद जी तौ लिकता चंद जी है....तौ वे एक आदमी री ब्लैक एंड व्हाइट फ़ोटू काडी जिणमे वो आदमी आपरी नाक ने हथाली सूं छुपायोडो बैठो हो, लिकता  चंद जी बोलिया ऎ म्हारा नकटा गुरू जी है, योंरो कैवणो है कि आज रे ज़मौने में सुपरगिरी रो लाडू जिने खावणों है तो उनो एक महत्वपूर्ण अंश है.....लिकताई. और मने सुपरगिरी रो शौक है. मैं ही ज हूं हारों सूं सुपर, म्हारे सूं भत्तो कोई नहीं, ने अगर म्हारे सूं भत्तो कोई है तो मैं उण सूं डबल भत्तो, कोई कने नहीं बैठाई तो मैं उने कने ऊबो रैऊं, वो कने ऊबो नहीं राखी तो थोडो आगो जा ने ऊब जाऊं, और आगो जा ने ऊबूं जरे कैऊं ..हौमले वाळो म्हारे लेवल रो कोनी सा, इण वास्ते मैं खुद नैडो नहीं जा रियो हूं.......ने मौको मिलतो ही पाछो नैडो आ जाऊं......पाछो नेडो आ ने भेर लिकतायों करूं.
मैं कैयो आप तो ढीठ चंद जी व्हे ज्यूं बात कर रिया हो...वे मुळक ने कैयो, ढीठियो म्हारो रिश्ते में इ ज है सा, मौरे हूतक पिण्डरू लागे.....हमें तू पूछेला म्हारा और कुण कुण रिश्तेदार है, तौ हुण...ढीटियो म्हारो भाई है,

 नागाई कुचमादी ने ओछाई म्हारी बैहनों है,                        

 फ़च्चर म्हौरी जात है ने रौळो म्हौरो गोत्र .

मैं कैयो ...मैं तो की पूछियो ही कोनी आपने और न की पूछूं....यूं तो इंसानियत रे नाते आप सूं भी अपणायत है म्हारी पण जदे तक आप थोडी गरिमा नहीं बणा ने राखो, मैं की नहीं पूछूं, आपरी लिकताई सुं आपरी इज इज्जत पें बोल री है, ने आ सुपरगिरी, आ भत्तागिरी जिने जिने लागी है उने उने ले डूबी है......लिकता चंद जी मुळकता ही रैया --- वे की जवाब देवता इत्ते में म्हारे मोबाइल री घण्टी बाजी, मैं कौल उठावण रो बटण दो चार बार दबायो तो भी कोरी घण्टी इ ज हुणीजे...हारा बटण दबा ने देख लिया घण्टी बन्द इ ज नहीं हूवती.......मै होचियो ओ मोबाइल खराब हु ग्यो दीखे....कि अचानक भरी नींद सूं म्हारी औंख खुल गी, तकिये कने पडियो म्हारो मोबाइल बाजतो हो ......ने कौल करणिया हा ..........लिकता चंद जी.

                                                            
मैं एक बार फ़ेर कौल कोनी उठाई और व्योंरी कौल ने मैं कई .....कोई कोनी उठावे, हारा बाट जो रिया है उण दिन री जिण दिन लिकता चंद जी ने थोडी सी क खुद री गरिमा बणायोडी राखण री अक्कल आ जाई.



:- के.बी.व्यास
फ़ैंकू भाई साहब रो इन्टरव्यू

बहुत दिनों सूं इच्छा ही के फ़ैंकू  भाई साहब  रो भी इंटरव्यू लियो जावे, क्यूं कि फ़ैंकू भाई साहब  री लम्बी लम्बी फ़ेंकण में मास्टरी है, लोग लपेटता ही रै जा ने फ़ैंकू  भाई साहब  फ़ैंकियो ही जावे........

तौ सा,..... हाची गळी रे मोड म्हाते टकर ग्या मन्ने फ़ैंकू भाई साहब  , ने मैं कर लियो औन द स्पौट व्योंरो इंटरव्यू.....
मैं कैयो फ़ैंकू भाई साहब  कई हाल चाल है?

                                                  

फ़ैंकू भाई साहब कैयो ; कई बताऊं यार एक तो ओ ओबामा मन्ने मिस कौलों दे दे ने दुखी कर काडियो है..
                                                                                                  
मैं कैयो..ओबामा ? वो अमरीका रो राष्ट्रपति? ने आपने मिस कौलों ?
फ़ैंकू भाई साहब कैयो ; हौं यार, जरे अबार तार घर जा ने उने पाछी कौल कर ने आयो हूं...

मैं कैयो ; तार घर ?  पण कौल रिटर्न करण वास्ते तार घर क्यूं गया, आपरे मोबाइल सूं इज पाछा लगा लेवता.
फ़ैंकू भाई साहब कैयो ; आ इज तो थों लोगो ने ठा कोनी, कि एस.टी.डी. लागे ० लगा ने, आई.एस.डी. लागे ०० लगा ने, पण ओबामा रो मोबाइल स्पेसल है, उने वास्ते ००० लागिया करे ने आ सुविधा तार घर में इ ज उपलब्ध है...
मै कैयो ; वाह फ़ैंकू भाई साहब वाह आप तो नयो ज्ञान दे दियो आज...पण आपने ठेठ तार घर जावण री तकलीफ़ उठावणी पडी....
फ़ैंकू  भाई साहब  बोलिया ; नहीं रे ....वो तो तार घर रे बारे मतीरा सप्लाई करण वास्ते गयो हो रे जरे ओबामिये ने कौल कर ली नहीं तो चला ने मैं उने कौल करण वास्ते कोई जाऊं जैडो हूं कई , किने कने टैम पडी है इत्ती......
मै कैयो ; सही है फ़ैंकू भाई साहब ..पण आ तो बताओ ओबामा कैवतो कई हो?......
फ़ैंकू भाई साहब बोलिया ; अरे की कोनी रे मतीरा चईजता उन्ने,
                                            
मै भी साप सट्ट कै दियो, अबार पौसिबल कौअन्नी.
मैं पूछियो ; क्यूं पौसिबल कोनी फ़ैंकू भाई साहब  ?
वे बोलिया ; अरे थने ठा कोनी यार ...मतीरा सप्लाई करण में म्हारा हारा हवाई जहाज बीजी चाल रिया है, उत्तर भारत में गर्मी पडे टंकार, रोज री ४०-५० ट्रिपों कराऊं जरे सप्लाई पूरी पडे, अबे इण बीच में मतीरा भर ने हवाई जहाज ने वौसिंग्टन भेजणो पौसिबल कोनी रे. ने अबार रौल में झौळ नैरी है...

मैं पूछियो; कई रौळ में झौळ हु गी फ़ैंकू  भाई साहब 
वे बोलिया ; म्हारा दो हवाई जहाजों रा तो सेल्फ़ स्टार्ट खराब हुयोडा है, १५० लोग रन वे माते उने घक्को लगावे जरे पायलेट खट्ट करती रो फ़स्ट गेर में घाल ने उडा ने ले ने जावे.
                                                                   
अमरीका भेज दियो उण हवाई जहाज ने तो पाछो उठे ऊं धक्को कुण लगाई...निरा ई लोचा हुया करे बाबू साब, इण मतीरे रे एयर सप्लाई धन्धे में....

जित्ते क फ़ैंकू भाई साहब बोलिया...अरे टैम कई हु गी यार?
मैं कैयो ; क्यूं आपरे कने हवाई जहाज तो है पण एक घडी तक कोनी ?
फ़ैंकू भाई साहब आ हुणतो इ मोटरसाइकल स्टार्ट कर ने रवाना हूवण लाग ग्या, पण फ़ैंकू भाई साहब तो फ़ैंकू है...तो रवाना हूवता हूवता बोलिया....अरे म्हारे कने तो सोने रे डायल माते १,२,३,४ वाळी जगह हीरा लागोडा वली घडी है, हमें उनो पट्टो चौंदी रो बणवावण वास्ते दियोडो है....जिको लेवण वास्ते होनारों री घाटी जाऊं रे.....ने फ़ैंकू भाई साहब   मुलकता हुआ, ढर्रर्रर्र...निकळ ग्या.






:- के.बी.व्यास

टेढा भाई साहब  रो इन्टरव्यू

आज इ ज ठा पडी सा कि टेढा भाई साहब  , आडी गळी में, ऊंदी हवेली में बिराजिया करे, जरे मैं हीदो उठे इ ज गयो. वे बारे इज बिराजियोडा हा, मने ठा ही कि टेढा भाई साहब   कदई भी बात रो हीदो जवाब नहीं दिया करे. जरे माहौल ने नरम राखण वास्ते मैं दोई हाथ जोड ने झुक ने इ ज स्टार्ट लियो.....पगेलागूं टेढा भाई साहब  . वे टंकार अंदाज़ में बोलिया
.............क्यूं ...म्हारी टौंग पकड ने गुडावणॊ है कई ......हीदो पोइंट माते आ, कई चईजे?


 मैं थोडो हंभळ ने कैयो :  आपरे मुखारविंद सूं हमेशा टेढा जवाबों रा फ़ूळ इ ज झरिया करे जरे मैं होचियो आज ....
टेढा  भाई साहब  बात बीच में काटता व्हा बोलिया : तू म्हारी तारीफ़ कर रियो है कि चासा ले रियो है, ने मैं फ़ूल झराऊं के पूरो दरखत झराऊं थने पूछियो कई,
मैं कैयो : नहीं सा वा बात कोनी, पण आप ही हो जिका बता सको कि टेढो जवाब देवण रे आनंद रो माहात्म्य कई है.

वे बोलिया : क्यूं ....थने मैं कोई आस्था चैनल रो बाबा जी लागूं कई जिको कोई माहात्म्य हमजाऊंला.
                                          

मैं कैयो ; नहीं सा ...मतलब एक आप इ ज हो जिका इण अदभुद कला माते प्रकाश घाल सको,
टेढा भाई साहब   ; अरे घाल लिया निरा ई परकास वरकास, ओपोने ने या तो फ़्यूज उडावणी आवे, या होमले वाळे ने करंट देवणी आवे,

मैं कैयो ; तबियत बिजी किकर है ठीक है सा ?
टेढा भाई साहब   कैयो ; दीखे कोनी कई...ने थने जास मिळतो व्हे तो करा दे मने उल्टियों, दुखा दे माथॊ, अणा दे मने बुखार
मैं कैयो ; वाह क्या हीदो जवाब दियो हो आप...म्हारो इ ज दिमाग टेढो है सा जिको आपरा जवाब टेढा लाग रिया है
वे बोलिया ; देख भई ऎडो है.....पूरो जगत टेढेपणे ऊं इ ज चल रियो है,पेट में गैस भरीज जा जरे उने काडण वास्ते थोडो टेढो हूवणो पडे,भाकरी माते चढणो व्हे तो रस्तो टेढो घुमावदार इ ज बणे जरे शिखर माते पूगों, हीदी औंगळी ऊं घी नहीं निकळे जरे कई किया करों, औंगळी टेढी करों, मोटरसाइकल में दो तरह रा स्टेंड व्हे, टेढे वाळे स्टेंड माते ऊबी गाडी पोज़ वाली लागिया करे...स्टाइल वाळी, स्वास्थ ठीक राखणों व्हे तो शरीर ने टेढे बौंके तरीके सूं मोड मोड ने योगासन लगावणा पडे
, ने और तो और आ प्रथ्वी खुद ही आपरे अक्ष माते साढा बयासी डिग्री माते टेढी घूम रही है,थरी हथई म्हाते तो निरा ज्ञानी बैठा है, पूछ लीजे व्योंने. ने म्हारे द्वारा रचित टेढा पुराण रो पहलॊ सूत्र है....जगत टेढा ब्रह्म सीधम..अर्थात केवल ब्रह्म ही सीधा है, और ये जगत टेढा.
मैं कैयो ; वाह टेढा भाई साहब  आप रा उदाहरण तो गज्जब रा है
वे कैयो ; तो तू कैवे तो दो कौडी वाळा उदाहरण दे दूं ?                           
                               

मै मूड चेंज करण वास्ते बोलियो ; भाई साहब  , टी शर्ट जोरदार पैरी सा
टेढा भाई साहब  फ़ट बोलिया ; तो ले फ़ाड काड इने ...ने बणा चींतरो ने कर ले थारी गाडी साफ़
मैं कैयो ; नहीं सा मैं तो तारीफ़ करी हूं
वै कैयो ; तो भई गाळ भी काड ले, घणो आफ़रो आ रियो है तो
मने हमज नहीं आयो कि किकर रिएक्ट करूं,
जरे फ़ेर बात पलटी ने कैयो ; आज गर्मी घणी  सा
टेढा भाई साहब झट बोलिया ; तो बरफ़ री हिल्ला मंगा दूं, पौड जाइजो उण माते
मैं थोडी मसखरी की और कैयो ; ....ने हौमे एक पंखो भी चला ने धर दीजो 
                                         
वे बोलिया ; क्यूं .....खैतान वाळो आपरी बेटी पनाई है कई मने जिका मूफ़त रा दो चार पंखा पडिया है म्हारे कने, ने व्योंने थारे हौमे चला ने रख दूं.
मैं कैयो ; भाई साहब  आप तो अमानत हो जोधपुर री
वे कैयो ; तो ले जा ने धर दे मने मंडोर रे संग्राहलय में
मैं कैयो ; आप तो वाकई टेढा भाई साहब  हो
वे कैयो ; अरे यार मैं नहीं आ दुनिया टेढी है, अबे देख एक सडक है हीदी, उने दोई तरफ़ बणियोडो हीदो लैण सर बजार ....ने लोग नौम धर दियो आडा बाजार, इनो नौम हूवणो चईजतो.....हीदो बजार, अबे बता मैं टेढो के दुनिया टेढी.
मैं कैयो ; १००% दुनिया टेढी है सा.
टेढा  भाई साहब  बोलिया ; क्यूं......तू म्हारो वकील लागोडो है कई जिको फ़ट म्हारी तरफ़दारी कर रियो है,
अठे तक आ ने मने लाग ग्यो, कि अबे खिसक लो..तो मैं कैयो ; ठीक सा चालूं जरे अबे मैं
वे बोलिया ; तो थने कोई फ़ेवीकौल सूं चेपियोडो है कई म्हारी चौंतरी माते


मैं कैयो ; टेढा भाई साहब री जय हो, इत्तो कै ने मैं मुडियो और हीदो महादेव रे मिंदर जा ने एक अगरबती लगा ने हाथ जोडिया, ने कैयो ...है महादेव कैडा कैडा पीस बणाया है तू....गर्दन उठाई तो देखियो कि अगरबत्ती रो घुंओ टेढो मेढो आकार ले ने ऊठतो हो ने सब तरफ़ सुगंध फ़ैलावतो.

के.बी.व्यास

Saturday, 25 May 2013



टाइम मशीन

आज से २००० हज़ार साल बाद जब पुष्करणा ब्राह्मणो का इतिहास टटोला जाएगा तो भा सा री हथई का उल्लेख कुछ यूं होगा........यहां सारे लोग हर तरह के रंग बिखेरते थे, जम के ऊंची ऊंची चेपते थे, बाकी के हंस हंस के लपेटते थे.
                                                                                                           
भक्ति भाव रे भरे हुए चित्र लगाते थे, ९९% लोग इधर उधर से अंटा कर शायरी लिखते थे, मूल शायर का नाम नहीं लिखते थे और जितने भी लाइक या कमेंट उस पे आते थे वो सारे खुद ही डकार जाते थे, मूल शायर को चनिया पप्पा भी नहीं देते थे. एक इंजीनियर साहब का ज़िक्र आता है जिन्हौंने समाज सुधार की लहर को पुनः जाग्रत किया और एक नई उम्मीद जगाई. पुष्करणा एकता पर एक बार एक उफ़ान के आने के भी साक्ष्य मिलते हैं.
                                                           
रूढियों और कुरीतियों पर सभी खुल के अपने अपने मत रखते थे. मुम्बई के एक शख्स का ज़िक्र आता है जिसे एक शायर उर्फ़ डौन उर्फ़ कहानीकार और उर्फ़ में पता नहीं क्या क्या कहते थे.यह शख्स मिठाइयों और आइसक्रीम मेंगो की फ़ोटुवें लगा लगा के मूंडे में पाणी की टूंटी खुलवा देता था. एक शख्स कभी मोरिये की, कभी चिडी कबूतर की, कभी गंटा बीडते हुओं की ज़बरदस्त फ़ोटुवें लगाता था, इस शख्स को साफ़ा गुरू से भी जाना जाता है, लोग साफ़ा बांधने की कला सीखने के लिए आते थे, और इस बंदे की सादगी में ही बंध के रह जाते थे.       
                       एडिस गिफ़्ट नामक जगह से आज भी राधे राधे सुनाई देता है. दो बोहरा बंधुओं में एक के बारे में इतिहासकारों में मतभेद है कि यह शख्स मूलतः जापान का था, फ़्रांस का था या भा सा ही था, क्यों कि एक शब्द है हाइकु, जो जापानी शब्द है और इस शख्स को हाइकु किंग का खिताब मिला हुआ था, दाढी ये फ़्रेंच कट रखता था, मगर बातें भा सा ओं जैसी टणकार करता था,
इनके छोटे भाई को धीरे से कोई औरिजिनल थौट खिसकाने का हुनर प्राप्त था, जिसे पढ के मौज की तरंग लहराया करती थी.
                                               लख जी की पौळ और हाथी चौगान दो स्तंभ गिने जाते थे,जिनकी कलम का जादू और अपनत्व का जादू सर चढ कर बोलता था. चौ.हा.बो., कमला नेहरू नगर,सरदारपुरा आदि जगहों पर बडी बडी टणकार हस्तियों के आवास होने के प्रमाण मिलते हैं. गंगानगर, नागपुर,चेन्नई,दिल्ली पता नहीं कहां कहां तक हथई का चस्का फ़ैला हुआ था, कुछ इतिहासकार तो यह भी कहते हैं कि यह चस्का दुबई, सिंगापुर, हौंग कौंग, अमेरिका तक फ़ैला हुआ था और इनमें से एक देश में तो एक महान विभूति ने सर्व-पतियों के हित में झंडा बुलंद किया था और सारे पतियों को आगे आ कर इसे थामने के लिए आह्वान किया था. अब इस बात पर इतिहास कार खोज कर रहे हैं कि कौन कौन था जिसने अपनी अपनी पत्नियों के कहने से इस झंडे से अपना हाथ हटा के जोड लिया था. अब अगर आप ये पूछ रहे हैं कि हाथ झंडे को जोडा या पत्नी को, तो इस बात पर इतिहासकारों ने लिखा है कि यह वे अपनी पत्नी से परमिशन ले कर ही बता सकते हैं कि सच बताना है कि नहीं बताना है.