Tuesday, 4 June 2013

तन्हाइयों में भी महफ़िले सजाना सीखा है
धूप के सफ़र में भी गुनगुनाना सीखा है
मोहताज नहीं ज़माने की महफ़िल ओ छांव के
हमने तो हर दरवेश से यही सीखा है
 
उजालों का इस्तकबाल करो ये सीखा है
गमों की गिरेफ़्त में ना रहो, ये सीखा है
हो बाहर घुप्प सी दुनिया,जो हाथ को हाथ ना सूझे
अंतस-दिया जलाना, अंधेरे से दौरान ए जंग सीखा है
 
तलाशी हज़ारों खुशियां ज़माने में, फ़िर ये सीखा है
करोडों खुशियां टिमटिमाती हैं भीतर, अब ये सीखा है
क्यूं लगाऊं मैं मेरे दर्द के इश्तेहार ज़माने भर में
जो कहना है कह दो इबादतों में,... यही सीखा है
 
 
के.बी.व्यास

Monday, 3 June 2013

दिल सुनाता रहा कलम लिखती रही
बात में से बात यूं ही खिलती रही
मैं इरादातन तो नहीं बैठा था वहां
मोड पे हर एक से नज़र मिलती रही

जो ज़िन्दगी सभी के दर्द दूर करती रही
उसी की रूह में यारों सदा गंगा बहती रही
तेरे वज़ूद से दूर कहां हूं मैं ज़रा देख
खुदाई नेक बंदों से ता उम्र यही कहती रही
 
झूठ की फ़ितरत, नए नए दांव लाती रही
सच से फ़िर हर बार, शिकस्त खाती रही
यूं तो हर दौर में जंग रही, सच झूठ की
सच बुलंद करने फ़रिश्तों की खेप आती रही
 
किसी के चंद लफ़्ज़ों से नेकी की महक आती रही
किसी के बेइंतेहा बोल लेने से यकीनी जाती रही
बात करने वालों ने बात को इतना ज़्यादा बोला
महफ़िल में बेवजह, बात की असरदारी जाती रही
 
के.बी.व्यास

Sunday, 2 June 2013

पाकीज़गी प्यार की आज कुछ इस कदर गहरी हुई है
जिस्म की सरहदों से आगे रूह से रूह की बातें हुई है
ज़ुबां खामोश, लफ़्ज़ गुम, मगर है गुफ़्तगू अजब सी
समंदर सी गहरी बात एक मुस्कुराहट में सिमटी हुई है

सोचता हूं मैं ये कहानी ज़िन्दगी में बहुत अजब सी हुई है
आजकल जादू भरे दिन महकते हैं रातें खुशगवार हुई हैं
सोच की सारी खिडकियों से तेरे खयालों की बयार आए
मेरे वज़ूद की दरो दीवारें, हज़ारों खुशबुऒं से महकी हुई हैं

कशिश अब दिल की गहराइयों तलक उतरी हुई है
वस्ल हो ये दुआ दिल से उठी लबों पे पंहुची हुई है
हर सांस के आने जाने पर तेरे नाम की सरगम है
सुबह कोयलों की कुहुक, शामें पपीहे का राग हुई है

न जाने कब कहां कैसे ये तिलिस्मी बात हुई है
दिल के महीन तारों में तेरे नाम की झंकार हुई है
कोई सुर उठा है तमनाओं के साज़ पे सज कर
कायनात के हर कोने तक उमंगों की बारात हुई है

के.बी.व्यास

Wednesday, 29 May 2013

गज़ल के हर एक लफ़्ज़ को कसम है ये कह देना
लोगों के दिलो रूह तक करना असर, ये कह देना

नेकी बदी की जंग तो हर दौर का हिस्सा रही है
ब्रह्मास्त्र है तू आज भी,बात ये कलम  से  कह देना

खुदा के वास्ते, सोच की गहराइयों को सम्हाले रखना,
डूबते हुओं को मिलेगा हौसला, ये शायरों से कह देना

बुलंदियां यूं तो अच्छी हैं,दिल को खुशियां देती हैं
मगर जो ये सर चढने लगें, इन्हें इन्कार कह देना

मतलब परस्त लोगों की बडी ये खास आदत है
पास आ के तुम्हारी हां में हां, ना में ना कह देना


के.बी.व्यास
हर अंधेरा दूर हो, दर्द की रातें सभी चकनाचूर हों
 सभी के आंगन में यारों उजली धूप खिलनी चाहिये

जोश जीने का सदा बढता रहे बढता रहे
मुश्किलों को लांघने का शौक होना चाहिये

साथ हों जब भी किसी के पास बैठे दो घडी
बात कोई यूं चले जो दिल को छूनी चाहिये

युद्ध के बादल छटें हैवानियत ये बंद हो
इंसान में इंसानियत का होश जगना चाहिये
 
रात हो तारों भरी और सुबह खुशगवार हो
मन रहे हर दम खिला उल्लास होना चाहिये

हाथ को आगे बढाएं या मिलें लग कर गले
दिल हमारे साफ़ हों और इरादे नेक होने चाहिये

ज़िंदगी कुछ यूं जिएं, काम कुछ ऐसे करें
मुड के देखें हम कभी तो फ़क्र होना चाहिये


के.बी.व्यास
इंसान को इंसान से इतना तो जुडना चाहिये
दर्द में डूबा हो कोई तो उसे कुछ स्नेह देना चाहिये

भीड में हो गर अकेला, दिल किसी का रो रहा
दो घडी रुक कर उसे फ़िर, कुछ आस देनी चाहिये

ज़िंदगी के मोड यारों, कुछ सुनहरे कुछ कठिन कमज़ोर हैं
साथ चल के दोस्त बन कर,ख्वाब बुनने चाहिये

कुछ वो कहे, कुछ हम सुनें,कुछ हम कहें कुछ वो सुनें
डोरियां रिश्तों की यारों, इस तरह मज़बूत बननी चाहिये

बात दिल की खुलकर कहॆं, बात दिल की खुलकर सुनॆं
सुनहरे एक मोड पर फिर उसका अंत होना चाहिये


के.बी.व्यास

Monday, 27 May 2013

लिकता  चंद  जी रो इन्टरव्यू


काले दोपहर रो भोजन कर ने होचियो अबे थोडी देर पौड लियो जावे,
जरे तकिए माते मथॊ टिकायों ने २-४ मिनट इ ज हुया व्हेला ने आडे री घण्टी बाज गी...
अरे यार इण टैम कुण आयो, आ होचतो होचतो मैं आडो खोलियो तो हौमे ऊबा हा.........लिकता चंद जी .

                                                                
लिकता चंद जी हाथ जोड ने बोलिया ..कई भा सा किकर ?
मैं कैयो .....लिकता  चंद जी आप और अबार ने म्हारे घरे ????
वे बोलिया मने ठा ही.... मैं थने ५० फ़ोन कर लिया हूं....मने ठा है न तो तू फ़ोन उठावेला, न पाछी कौल करेला, न म्हारो इन्टरव्यू लेवेला, जरे मैं होचियो हीदो घरे इ ज चालॊ, दोपारा खाणो खा ने तू थोडी देर हूया करे जरे मने ठा ही तू घरे मिलेला ही मिलेला.
मैं कैयो...आप वाकई लिकता चंद जी हो सा....वे चीकणा घडा व्है ज्यूं हंसता हुआ मौने आय ग्या...                                                                                               

ने सोफ़े माते बैठ ने बोलिया ...मने ठा है थारे इन्टरव्यू रो पैलो प्रश्न कई व्हैला.....वो व्हैला....लिकताई रो माहात्म्य कई है ?
मैं कैयो ..लिकता चंद जी  मैं तो की पूछियो ही कोई आपने और न पूछूं. लोग आपने चाहे कित्तो ही इशारो दे दे, आडॆ टेडे तरीके सू हमजा दे, डायरेक्ट मूंडे माते की कै देवे तौ भी आप आपरी लिकतायों नहीं छोडोला.
लिकता  चंद जी मुळक ने बोलिया...देख ऎडो है लिकताई कलयुग रो एक गुण है, लिकता पुराण में कैयोडो है..."हमजो तो अपमान नहीं हमजो तो कॊई अपमान नहीं"....ने हमें तू पूछेला म्हारा गुरू कुण है?
मैं कैयो ...मैं तो की पूछियो ही कोनी आपने और न की पूछूं.
पण लिकता चंद जी तौ लिकता चंद जी है....तौ वे एक आदमी री ब्लैक एंड व्हाइट फ़ोटू काडी जिणमे वो आदमी आपरी नाक ने हथाली सूं छुपायोडो बैठो हो, लिकता  चंद जी बोलिया ऎ म्हारा नकटा गुरू जी है, योंरो कैवणो है कि आज रे ज़मौने में सुपरगिरी रो लाडू जिने खावणों है तो उनो एक महत्वपूर्ण अंश है.....लिकताई. और मने सुपरगिरी रो शौक है. मैं ही ज हूं हारों सूं सुपर, म्हारे सूं भत्तो कोई नहीं, ने अगर म्हारे सूं भत्तो कोई है तो मैं उण सूं डबल भत्तो, कोई कने नहीं बैठाई तो मैं उने कने ऊबो रैऊं, वो कने ऊबो नहीं राखी तो थोडो आगो जा ने ऊब जाऊं, और आगो जा ने ऊबूं जरे कैऊं ..हौमले वाळो म्हारे लेवल रो कोनी सा, इण वास्ते मैं खुद नैडो नहीं जा रियो हूं.......ने मौको मिलतो ही पाछो नैडो आ जाऊं......पाछो नेडो आ ने भेर लिकतायों करूं.
मैं कैयो आप तो ढीठ चंद जी व्हे ज्यूं बात कर रिया हो...वे मुळक ने कैयो, ढीठियो म्हारो रिश्ते में इ ज है सा, मौरे हूतक पिण्डरू लागे.....हमें तू पूछेला म्हारा और कुण कुण रिश्तेदार है, तौ हुण...ढीटियो म्हारो भाई है,

 नागाई कुचमादी ने ओछाई म्हारी बैहनों है,                        

 फ़च्चर म्हौरी जात है ने रौळो म्हौरो गोत्र .

मैं कैयो ...मैं तो की पूछियो ही कोनी आपने और न की पूछूं....यूं तो इंसानियत रे नाते आप सूं भी अपणायत है म्हारी पण जदे तक आप थोडी गरिमा नहीं बणा ने राखो, मैं की नहीं पूछूं, आपरी लिकताई सुं आपरी इज इज्जत पें बोल री है, ने आ सुपरगिरी, आ भत्तागिरी जिने जिने लागी है उने उने ले डूबी है......लिकता चंद जी मुळकता ही रैया --- वे की जवाब देवता इत्ते में म्हारे मोबाइल री घण्टी बाजी, मैं कौल उठावण रो बटण दो चार बार दबायो तो भी कोरी घण्टी इ ज हुणीजे...हारा बटण दबा ने देख लिया घण्टी बन्द इ ज नहीं हूवती.......मै होचियो ओ मोबाइल खराब हु ग्यो दीखे....कि अचानक भरी नींद सूं म्हारी औंख खुल गी, तकिये कने पडियो म्हारो मोबाइल बाजतो हो ......ने कौल करणिया हा ..........लिकता चंद जी.

                                                            
मैं एक बार फ़ेर कौल कोनी उठाई और व्योंरी कौल ने मैं कई .....कोई कोनी उठावे, हारा बाट जो रिया है उण दिन री जिण दिन लिकता चंद जी ने थोडी सी क खुद री गरिमा बणायोडी राखण री अक्कल आ जाई.



:- के.बी.व्यास