मंत्र तन्त्र और यंत्र
भारत में तीन तरह की चीजे होती हैं –
मंत्र, तन्त्र और यंत्र | मंत्र मनुष्य को ऊपर ले जाते हैं, तन्त्र मनुष्य को नीचे
ले आते हैं और यंत्र ? यंत्र मनुष्य की सहायता करते हैं, वे ऊपर भी ले जा सकते है वे
नीचे भी ला सकते हैं, वे सिर्फ सहायक होते हैं | आजकल यंत्रों का बोलबाला है | अंग्रेजी
–हिन्दी में कहें तो सब कुछ मशीनीकरण हो रहा है | दिन ब दिन हम मशीन
होते जा रहे हैं – बिना इंसानियत को केन्द्र में रखे हुए, और इसलिए मशीन होने का
हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ रहा है |

अब अधिकांशतः कार्य मशीनों से हो
रहा है , यंत्रों से हो रहा है | यंत्र ना हो तो शायद जीवन ही ना चले | इतना ज्यादा
हम यंत्रों पर निर्भर हो गए हैं | इंटरनेट ठप्प हो जाए तो मुसीबत हो जाए, मोबाइल बंद
हो जाए तो जीना मुश्किल हो जाए | ये आलेख भी आप इंटरनेट के जरिए पढ़ रहे हैं| हर तरफ
यंत्र ही यंत्र है, मशीन ही मशीन और ये इतनी द्रुत गति से आगे बढ़ रहा है कि पूछिए मत
|

परन्तु इसके अनुपात में मंत्र गायब हैं | हमको मंत्रों का उच्चारण सही नहीं लगता
| मंत्र जीवन की आंतरिक स्थिति को सम्हालते हैं | इससे आंतरिक धरातल पर असर पड़ता है और वो धीरे धीरे सुंदर होता चला जाता है | इंसान के मरने के क्षण में उसकी आंतरिक स्थिति ही उसके सबसे अधिक काम आती है | दूसरा
कोई नजदीक से नजदीक का भी रिश्तेदार काम नहीं आता | केवल इंसान का आंतरिक जीवन ही काम
आता है और इस समय पता चलता है अकेले यंत्र बेकार थे |

मंत्र जीवन जीने की शैली है | जो लोग मंत्र
नही अपनाते उनका जीवन धीरे धीरे यंत्रों के हाथ में चला जाता है और फिर उससे बाहर आना
कठिन होता है , लेकिन अगर मंत्र जीवन में हो तो यंत्र भी बहुत सहायक बन जाते हैं |
यंत्र आज की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है और वो इसलिए कि जीवन में मंत्र नहीं हैं
| तन्त्र यदि जीवन में आ जाए तो विनाश है और तन्त्र के साथ खुद का अहंकार भी जुड़ जाए
तो सर्वनाश है | मंत्र अपने साथ समस्त दूसरों का भला चाहता है और तन्त्र केवल अपना
भला चाहता है | इतिहास इस बात का गवाह है |
हम जीवन में यंत्रों के साथ मंत्र भी अपना
लें तो कोई समस्या नहीं है |
के.बी.व्यास
No comments:
Post a Comment