Saturday, 16 July 2016

टेढ़ा भाईसाहब का इंटरव्यू
                   आज पता चला हुजूर कि टेढ़े भाईसाहब, तिरछी गली में, उल्टी हवेली में बिराजते हैं, तो फिर मैं सीधा वहाँ ही गया | वे बाहर ही बिराजे हुए थे, और मुझे पता था कि टेढ़े भाईसाहब कभी भी बात का सीधा जवाब नहीं दिया करते | तो माहौल को जरा नरम रखने के लिए मैंने दोनों हाथ जोड़ कर झुक के ही स्टार्ट लिया .......... पाँय लागूं टेढ़ा भाईसाहब | तो उन्होंने टंकार अंदाज में कहा  ... क्यूँ .....मेरी टांग पकड़ के गिराना है क्या ?......तू सीधा पाइंट पर आ जा, क्या चाहिये तुझे ?
                    मैंने थोड़ा संभल के कहा : आपके मुखार्विंद से हमेशा सीधे सवालों के टेढ़े जवाब के फूल ही झरते है तो आज मैंने सोचा कि ........
                     टेढ़े भाईसाहब ने बात को बीच में काटते हुए बोले : तू मेरी तारीफ़ कर रहा है या यूं ही चासा ले रहा है, और मैं फूल झराऊं या पूरा का पूरा पेड़ झराऊं तुझसे पूछा क्या मैंने ?
                 मैंने कहा : नहीं हुजूर वो बात नहीं है, लेकिन आप ही हो जो बता सकते कि टेढ़े जवाब देने के आनंद का क्या माहात्म्य है ?
                                            
                         वे बोले : क्यूँ ........तुझे मैं आस्था चेनल का कोई बाबा जी लगता हूँ जो तुझे माहात्म्य समझाऊंगा ?
                      मैंने कहा : अरे नहीं हुजूर ...आप ही हो जो इस बात पर प्रकाश डाल सकते हो |
                  टेढ़े भाईसाहब बोले : अरे घाल दीये निरे सारे परकास वरकास, हम या तो फ्यूज उड़ाते है या सामने वाले को करंट देना जानते है, और ये कह कर वो टेढ़े मुंह से मुस्कुराने लगे |
                    मैंने बात पलटी : तबियत वगैराह कैसी है आपकी ....ठीक है हुजूर ?
टेढ़े भाईसाहब ने कहा : क्यूँ दिखता नहीं है तुझे क्या .....और तुझे जास आ जाए तो करवा दे मुझे उल्टियां, दुखा दे मेरा माथा, बुला ले मेरे लिए बुखार|
मैंने कहा : वाह ..क्या सीधा जवाब दिया है आपने | मेरा ही दिमाग टेढ़ा है जो आपके जवाब टेढ़े लग रहे है |
                     वे बोले : देख भई ऐसा है ....पूरा जगत टेढ़ेपण से ही चल रहा है, पेट में गैस भरीज जाए तो उसे निकालने के लिए थोड़ा टेढ़ा होना पड़ता है, पहाड़ी पे चढ़ो तो रस्ता टेढ़ा घुमावदार ही होता है और तब जा कर शिखर पे पहुँचा जाता है, सीधी अंगुली से घी नहीं निकलता, अंगुली को टेढ़ा करना पड़ता है, मोटरसाइकिल में दो तरह के स्टेंड होते हैं, वो जो टेढ़े वाले स्टेंड पे खड़ी करो तो वो पोज वाली लगती है ...स्टाइल वाली | स्वस्थ रहना हो तो टेढ़े मेढे तरीके से योगासन लगाने पड़ते है, और तो और ये पृथ्वी भी अपने अक्ष पर साढा बयासी डिग्री पर टेढ़ी ही घूम रही है | तेरी हथाई पे बहुत सारे ज्ञानी बैठे है पूछ लेना उनसे | मेरे द्वारा रचित टेढ़ा पुराण का पहला सूत्र है .....जगत टेढ़ा ब्रह्म सीधम.....अर्थात केवल ब्रह्म ही सीधा है और ये जगत टेढ़ा |
                         मैंने कहा : वाह टेढ़े भाईसाहब वाह , आपके उदाहरण तो गज्जब के हैं |
वे बोले : तो तू कहे तो दो कोड़ी वाले उदाहरण दे दूँ ?
मैं मूड़ बदलने के लिए बोल पड़ा : टी शर्ट बहुत जोरदार पहनी है आपने |
टेढ़े भाईसाहब फट बोले : तो फाड़ दे इसको ...और बना के रद्दी कपडा, कर ले तेरी मोटरसाइकिल साफ़ |
                                           मैंने कहा : नहीं हुजूर , मैंने तो तारीफ़ की है |
उन्होंने कहा : तो भई बुरा भला भी कह ले, ज्यादा गैस बन रही है तेरे पेट में तो |
                                                  
अब मुझे समझ नहीं आया कि मैं कैसे रिएक्ट करूँ मगर फिर मैंने बात को पलटा और कहा : आज गर्मी बहुत है हुकुम |
टेढ़े भाईसाह्ब फट से बोले : तो बर्फ की सिल्ली मंगवा दूँ तेरे लिए उसपे लेट जइयो तू |
मैंने थोड़ी सी मसखरी की : .............. और एक दो पंखे भी चला के रख देना मेरे सामने |                                               
वे बोले : क्यूँ .........खेतान वाले ने अपनी बेटी का ब्याह किया है क्या मेरे साथ, जो मुफ्त के दो चार पंखे तेरे सामने चला के रख दूँ |
मैंने कहा : आप तो अमानत हो हमारे देश की |
उन्होंने कहा : तो रख दे मुझे नेशनल म्यूजियम में ?
मैंने कहा : वाह हुजूर वाह ..आप तो वाकई टेढ़े हैं |
उन्होंने कहा : अरे यार मैं नहीं ये दुनिया टेढ़ी है | अब देख एक सड़क है सीधी उसके दोनों तरफ बना हुआ है सीधा लाइनसर बाजार ....तो लोगों ने नाम रख दिया आडा बाजार ....इसका नाम होना चाहिये था ...सीधा बाजार ! ........अब बता तू कि मैं टेढ़ा कि दुनिया टेढ़ी |
मैंने फट से कहा : १०० % दुनिया टेढ़ी हुजूर |
टेढ़ा भाईसाहब बोले : क्यूँ .....तू मेरा वकील लगा हुआ है जो फट से मेरी तरफदारी कर रहा है |
अब मुझे लगा कि खिसक लो यहाँ से ....तो मैंने कहा : ठीक प्रभु , तो मैं चलूं  |
उन्होंने कहा : तो तुझे कोई फेविकॉल से चिपकाया हुआ थोड़ी है मेरे बाहर की चौंतरी पर |
                                                
मैंने कहा : टेढ़ा भाईसाहब की जय हो ...इतना कह कर मैं उठा और चल दिया वहाँ से और सीधा महादेव के मंदिर में आ गया और बोलने लगा मन ही मन .......है प्रभु तूने कैसे कैसे पीस बनाएँ है तू महान है प्रभु ....यह कह कर गर्दन उठाई तो देखा कि अगरबत्ती का धुंआ टेढ़ा मेढा आकार लेता हुआ सब तरफ सुगन्ध फैला रहा था |




के.बी.व्यास 

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