दोहे
By : के.बी.व्यास
By : के.बी.व्यास
1) मिले मित्र जो कलयुग में, मन से दीजे मान
जिसने पीड़ा कम करी, उसको अपना जान
2) जिस घर नर आदर करे, नारी के सब रूप
उस नर ही को जानिये, मानव देव स्वरूप
3) अंटी में जब धन बढे, अकडू भरे उड़ान
तुच्छ तुच्छ सब को कहे, मन में भरे गुमान
4) अहंकार पल पल बुने, मैं ही मैं का जाल
इसी नशे से बढ़ रहे, जीवन के जंजाल
5) बूँद बूँद सागर बने, वोट वोट सरकार
सही व्यक्ति जितवाइये,जात पात बेकार
6) पंख मिले उल्लास के, लक्ष्य बादलों पार
मंज़िल मुझसे कह रही, सपने कर साकार
7) झूठ कपट को देख कर, कौन करे अब क्षोभ
कलयुग में सर पे चढा, धन पदवी का लोभ
8) निंदा जब भी कीजिए, इतना रख लें याद
भीतर बैठे पाप को, स्वयं दे रहे खाद
9) जीवन हर पल जंग है,जान सके तो जान
अंतर मन ही जीत है, मान सके तो मान
10) माटी जैसी पड गई, वैसा उठे विचार
जिसमें जितना ज्ञान है, उतना ही आचार
11) अंतर्मन से देख ले, संसार विश्व का रूप
बैरी भी आ के मिले , तुमसे प्रेम स्वरूप
12) इक पल में ही बीत गए, बावन ऋतु बहार
नए कमल जीवन जल में, भीगें मेह फुहार
13) अंदर मन में
जूझ रहा , बाहर सब है ज्ञान
अंदर बाहर
एक करे , वही ज्ञान का सार
14) सोने चांदी
से बड़ा , यह तो है अनमोल
मणिक रतन बेजोड़
हैं ,जीवन को तू खोल
15) मानव जीवन
में मिला , कुदरत का संदेस
सबका हितकर
सोचिए, रहो देस परदेस
Beautiful....👌👌👌👌
ReplyDeleteNice lines👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼
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