२४ घंटे
हमको एक दिन में २४ घंटे मिलते हैं |
अब इसका उपयोग हम सार्थक कार्य में करें या निरर्थक कार्य में, ये हम पर ही निर्भर
करता है | प्रधानमन्त्री को भी २४ घंटे मिलते हैं, युनाइटेड नेशंस के चीफ को भी २४
घंटे मिलते हैं, एक बिजनेस मैन को भी २४ घंटे मिलते है और हर नौकरी करने वाले को
भी २४ घंटे मिलते हैं | इनमें से कोई तो अपनी उम्र में इतना कार्य कर जाता है कि
हम सोच भी नहीं सकते और कोई कोई इतना सामान्य गति से कार्य करता है कि हम उसे कहते
है, ये मनुष्य कार्य धीरे धीरे कर रहा है | देखना ये है की हम दुनिया में कौनसी
गति से काम कर रहे हैं ?
ये माना जाता है कि मनुष्य एक गति
से कार्य करता है, लेकिन ये गति बढ़ाई भी जा सकती है और घटाई भी जा सकती है | हमारा
ध्यान जिस दिशा में होता है वो चीज बहुत तेज गति से आगे बढ़ती है | जैसे अगर किसी
का ध्यान कोई विज्ञान की किसी चीज पर है और वो कुछ खोजना चाहता है तो वो यह कर
सकता है | कहते हैं कि हमारा ध्यान वहां केंद्रित हो जाना चाहिए तो वो चीज अंत में
द्रुत गति से हो जाती है | ध्यान अक्सर एक दिशा में होता है लेकिन अगर ध्यान सभी
दिशाओं में एक साथ हो जाए तो ? हर पल ध्यान सभी दिशाओं में हो, एक पल के बाद दूसरा
पल इसी तरह गुजर जाए तो ? इसको पचाना जरा मुश्किल है, मगर हमारा ध्यान ऐसा हो सकता
है |
लाखों करोड़ों लोग हैं इस
दुनिया में, सभी की अपनी अपनी गति है | जैसे पिछले २० सालों में हमने देखा कि जो
प्रगति इंसान ने तकनीक में अब की है वैसी हमारी जानकारी में किसी ने अभी तक नहीं
की | पिछले २० सालों में जो हम आगे बढे हैं वो वाकई तारीफ़ के काबिल है | ये किसी
इंसान की ही गति है | तकनीकी तौर पर अभी कुछ नया आया ही होता कि पता चला कुछ
महीनों में वो पुराना पड़ जाता है,और फिर कुछ नया आ जाता है | आने वाले १०० सालों
में तो बहुत द्रुत गति से तकनीक में वृद्धि होगी | तो जिस तरह से गति हमारी तेज़
हुई है उसे देख के तो लगता है कि हमनें एक साल में दस बीस साल ज़ी लिए | कभी कभी तो
लगता है कि कहाँ जा के रुकेगा ये सब | मगर जनाब ये रुकेगा कभी नहीं, इसी तरह आगे
बढ़ता रहेगा |


हम बात कर रहे थे कि पूरी
दुनिया में हम कौनसी गति पर हैं | क्या हम दुनिया में सबसे आगे है ? क्या हम
दुनिया में सबसे पीछे हैं ? या ना आगे ना पीछे, हम बीच में हैं ? बीच के तो और भी
अलग अलग स्तर हो सकते है | गति के साथ साथ हम सुरक्षित भी हैं, यह एक महत्वपूर्ण
बात है | हमारे २४ घंटे में हम कितना आगे बढ़ते हैं और कितना अपने साथ लोगों को आगे
बढाते हैं | उन लोगों को आगे बढाते हैं जो पीछे रह गए | इसलिए स्वयं की निरंतर
प्रगति ही हमारा ध्येय होना चाहिए | अपने भीतर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम आगे
बढ़ेंगे और सबसे पीछे वाले को भी आगे बढ़ाएंगे |
इसके लिए जरूरी है नियमितता | हम
रोज यह सोचें कि आज हमें क्या करना है ? अगर हम सवेरे १० मिनट लगा कर यह तय कर लें
कि आज के दिन क्या करना है तो शुरुआत हो सकती है | उसके बाद काम की गति को बढाते
रहें | ४ से ६ काम लें, ६ से ८ काम लें फिर ८ से १२ काम लें, तो धीरे धीरे हम ४ या
६ महीने में वो सब कुछ कर लेंगे जो हमने सोच रखा था, और जो सोच रखा था उससे कहीं
अधिक कर सकते हैं | उस समय हमें पता चलता है हमारे भीतर छुपी हुई कार्य क्षमता का
| हमारे भीतर की कार्य क्षमता अनंत है और एक तरह से हमें आने वाले कई वर्षो की खबर
पहले ही लग जाती है, सैंकड़ो वर्षो की बिलकुल ठीक ठीक समझ हमें पहले से ही आ जाती
है |
ये चक्र है समय का जो हमें
यहाँ २४ घंटे के लिए मिला है, दूसरे ग्रहों
पर इससे ज्यादा का मिला हो सकता है कहीं पे कम | पृथ्वी २४ घंटे में एक
अपना चक्कर लगाती है और एक पूरे साल में सूर्य के चारों तरफ एक चक्कर लगा लेती है
| यह पृथ्वी का नियम है | इस २४ घंटे में हम अपनी गति को कितना बढ़ा सकते है ये हम
पे निर्भर करता है | ये जिन्होंने जाना वो भी इंसान ही है मगर जागा हुआ इंसान है |
जाग जाए तो जान जाए |
के.बी.व्यास
(यह लेख मेरे अपने विचारों
की अभिव्यक्ति है | आप इससे सहमत हों या नहीं यह आपकी स्वतंत्रता है | उचित समझें तो
जहाँ आपकी सहमति हो उसे अभिव्यक्त कीजिएगा और जहाँ असहमति हो तो उसका कारण शेअर कीजिएगा , ताकि
मेरा चिंतन और प्रखर हो सके | संभव है मुझे भी कुछ नया सीखने को मिल जाए )

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