जन्मपत्री और कर्मपत्री
मेरा जन्म जोधपुर के ब्राह्मण
परिवार में हुआ और हमारे यहाँ तकरीबन हर घर में जन्मपत्री का कोई न कोई जानकार
बैठा है , मगर कर्मपत्री का जानकार मिलना मुश्किल है , अर्थात कर्मों का हिसाब
किताब बताने वाले बहुत कम हैं | कुछ लोग जो जन्मपत्री देखना जानते है वो कहते हैं
कि ६० से ७० प्रतिशत तक उनकी बात सही होती है | कोई अगर जिज्ञासु हो तो शायद ८०
प्रतिशत या यहाँ तक कि ९० प्रतिशत बात सही हो जाती है | परन्तु सारे मामलों में १००
प्रतिशत बात सच नहीं होती | तो जब १०० प्रतिशत बात सही नहीं होती तो उसमें समय
व्यतीत करने की क्या जरूरत है ? ऐसा मेरा मानना है |

असल में मनुष्य के
भविष्य को लेकर कई सम्भावनाएं होती है, जो व्यक्ति के हृदय में उठने वाले भाव,
मुँह से बोले जाने वाले शब्द और मनुष्य के किए हुए कृत्यों पर निर्भर करता है |
लेकिन जन्मपत्री में विश्वास करने वाले यह कहते हैं कि हृदय के भाव, बोल और कृत्य
कैसे होंगे यह तय होता है | जब यह तय होता है तो १०० प्रतिशत फल क्यों नहीं मिलता?
यहाँ आकर वे कोई सन्तोषजनक उत्तर नहीं दे पाते|
एक समस्या वे बताते हैं
कि जन्मपत्री में जातक के जन्म को लेकर ही
दुविधाएं हैं | जब बच्चे ने पहली बार रोना शुरू किया वो समय लिया जाए, या जिस समय
नाळ कटती है वो समय लिया जाए, या जिस समय बच्चा बाहर आ गया पूरा का पूरा वो समय लिया जाए | इसके बाद जो समय को नोट
कर रहा है वो भी क्या समय को सही सही नोट कर रहा है या नहीं, ये सारे प्रश्न है
जिनका उत्तर सही नहीं होता इसलिए १०० प्रतिशत फल नहीं मिलता | फिर वे इससे भी आगे
जाते है कि गर्भाधान का समय निकाला जाता है | अब उसमें भी ४८ घंटे होते है जब
गर्भाधान होता है, तो अमूमन आइडिया लग जाता है लेकिन १०० प्रतिशत, ताल ठोक के कोई
बात कह देना संभव नहीं, कुछ बाते हैं जो सही हो सकती हैं मगर सभी बाते शत प्रतिशत वैसी
ही होंगी जैसा बताया जाए |

जन्मपत्री में ९ ग्रह और १२ राशियों के विभिन्न योग के कारण कुछ तयशुदा फल
होते हैं , अर्थात जैसी ग्रहों की दृष्टी मनुष्य पर पडती है वैसा ही फल उसे मिल जाता
है | मगर मनुष्य का प्रभाव भी इन ग्रहों पर पडता है | ये दो तरफा चीज होती है | जब
मनुष्य का प्रभाव इन ग्रहों पर पडता है तो आमूल चूल परिवर्तन हो जाता है | ये अंतर
मन के विश्वास के आधार पर होता है | इसके अलावा अब २०१२ से पृथ्वी का ध्रुव तारा
बदल गया है | याने पृथ्वी घूम गई है | इसलिए विभिन्न ग्रहों का प्रभाव वो नहीं रहा
जो हमारी जन्मपत्री की किताबों में लिखा है |
ब्रह्मांड भी निरंतर फैलता जा रहा है | हर क्षण परिवर्तन हो रहा है | तो जन्मपत्री देखना और लोगो को भाग्य बताना दोनों हानिकारक हैं
|
जो बात प्रकृति कुछ समय बाद या
कुछ सालों के बाद बताना चाहती है, उसे आप आज बता रहे हैं | यह प्रकृति के विरुद्ध
जाने वाली बात है | इसका फल मिल के रहता है | ऐसा करना आपके विरोध में जाता है |
जिसे बताया उसका भी कर्म क्षीण हो जाता है और प्रकृति के प्रगति चक्र में बाधा
उत्पन्न हो जाती है | आचार्य श्रीराम शर्मा जो युग निर्माण योजना के पुरोधा हैं ने
इस बारे में कहा था “जो जानते हैं वो बताते नहीं और जो बताते
है वो जानते नहीं ” इसलिए कुछ तो है कि हमें स्वयं अपना भविष्य खुद ही ढूँढना
होगा क्यों कि दूसरा कोई और ढूँढ ही नहीं सकता |

जो लोग भविष्य बताते हैं वे लोग
दोहरा नुकसान करते है | एक तो वे प्रकृति के विरोध में जाते हैं , जो बात कल पता
चलनी थी वो आज पता चल जाती है, और दूसरी बात ये कि वे लोगों के कर्म क्षीण कर रहे
होते हैं | फिर तीसरी बात ये कि आपने जो भी बताया वो सही हो गया तो अक्सर अहंकार आ
जाता है, यह एक और समस्या है |
अगर आपने बता दिया कि अमुक कार्य नहीं होगा तो व्यक्ति के साहस पर चोट पहुँचती है और अगर ये बता दिया कि अमुक कार्य हो जाएगा तो वो व्यक्ति उतना प्रयास नहीं करेगा जितना उसे करना चाहिये | दोनों परिस्थितीयों में मनुष्य के कर्म क्षीण हो जाते हैं |
हम अगर चाहे अपना ही भविष्य जानना तो
हममें वो सम्भावनाएं हैं कि हम जान जाएँ कि हमारा भविष्य क्या होगा ? जैसा कि
मैंने पहले कहा कि भविष्य को लेकर कई सम्भावनाएं होती है | उनमें से एक का चुनाव
हम कर सकते है या सभी चीजे हो जाएँ उसका भी चुनाव कर सकते हैं, यह पूर्णतया हम पर
ही निर्भर करता है |
ऐसे में बात होती है कर्मपत्री की,
कि हमारे कर्मों का लेखा जोखा बेहतर हो और बात बन जाए | जंहा बात हमारे कर्मों पर
आ जाती है वंहा १०० प्रतिशत बात अपनी हो जाती है | जब हमें कुछ नहीं मालूम कि कल क्या
होगा ऐसे में ही मनुष्य के हृदय के भीतर विश्वास की ज्योत जागृत होती है और
विश्वास पूरे ब्रह्मांड को हिला सकता है, जीवन में आमूल चूल परिवर्तन ला सकता है |
भीतर का विश्वास हमारे अतंर्मन में हजारों कपाट को खोल देता है, एक ज्वलंत ऊर्जा हमारे
सारे भ्रम के अन्धकार को हटा देती है, और केवल तेजस्वी प्रकाश हमें दिखाई देने लगता
है | एक बार विश्वास पैदा हो जाए तो उसे दृढ़ करना चाहिए और यह होना हर मनुष्य में संभव
है |ऐसा होने पर हमें खुद ही पता चलने लगता है कि आने वाले कल में
हमारे साथ क्या होने वाला है |
कर्मों
के अनुसार यदि जीवन जिया जाए तो हम पाएंगे कि सब कुछ हमारे ही भीतर है | ये जो
बाहर हम देखते है जगत में, वो सब कुछ भीतर हो रहा होता है | हमारे भीतर जो चल रहा
है ठीक वही हमें बाहर नजर आता है | बाहर का संसार वही रहता है, बस हमारा दृष्टिकोण
बदल जाता है | इसलिए अगर कुछ ऐसा हुआ है जो हृदय को उल्लासित नहीं कर रहा तो
कर्मपत्री के अनुसार अपने भीतर उतरिए और अपने में बेहतर बदलाव कीजिए, तो आप पाएंगे
कि उसी क्षण बाहर की दुनिया में भी बेहतर बदलाव हो गया है, उसका आभास हो जाता है |
हमारा हृदय तब उल्लास से ओत प्रोत हो जाता है |
के.बी.व्यास

(आप इस आलेख से सहमत हों या नहीं यह आपकी स्वतंत्रता है | उचित समझें तो जहाँ आपकी सहमति हो उसे अभिव्यक्त कीजिएगा और जहाँ असहमति हो तो उसका कारण शेअर कीजिएगा , ताकि मेरा चिंतन और प्रखर हो सके | संभव है मुझे भी कुछ नया सीखने को मिल जाए )
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