Tuesday, 21 June 2016

फेंकू चंद जी का इंटरव्यू
                                              
           बहुत दिनों से इच्छा थी कि फेंकू चंद जी का इंटरव्यू लिया जाए, क्यों कि फेंकू चंद जी फेंकने में बहुत माहिर हैं | उनकी लम्बी लम्बी फेंकने में मास्टरी है , लोग लपेटते ही रहते हैं और फेंकू चंद जी फेंकते ही रहते है |
तो साहब ..सच्चे मुहल्ले में, कसम वाली गली में मुझसे टकरा गए फेंकू चंद जी , और मैंने कर लिया उनका ओन द स्पॉट इंटरव्यू 
                       
..............मैंने कहा फेंकू चंद जी क्या हाल चाल हैं ? फेंकू चंद जी बोले क्या बताऊँ यार इस ट्रंपिये ने मिस काल दे दे के दुखी कर रखा है |
मैंने कहा ...क्या ? वो अमेरिका का राष्ट्रपति मि.ट्रंप ! उसने आपको मिस कॉलें दी |    
                                                                                      

फेंकू चंद जी ने कहा  हाँ यार अभी टेलीग्राम ओफिस जा कर उसे वापिस कॉल करके आया हूँ |
मैंने कहा टेलीग्राम ओफिस ? आप टेलीग्राम ओफिस क्यूँ गए | अपने मोबाइल से ही पुनः कॉल लग जाती |
फेंकू चंद जी ने कहा ये ही तो बात है यार जो तुम लोगों को पता नहीं है, कि एस टी डी कॉल लगती है ० लगा कर, इंटरनेश्नल कॉल लगती है ०० लगा कर लेकिन ट्रंपिये का मोबाइल स्पेशल है उसके लिए ००० लगाना पड़ता है, और ये सुविधा सिर्फ टेलीग्राम आफिस में ही है |
मैंने कहा वाह फेंकू चंद जी आपने तो नया ज्ञान दे दिया आज ....लेकिन आपको ठेठ टेलीग्राम ओफिस आने की तकलीफ जो उठानी पड़ी |
फेंकू चंद जी बोले नहीं रे ...वो टेलीग्राम ओफिस के बाहर मतीरे सप्लाई करने आया था, तो मैंने सोचा उसे कॉल कर लेते हैं, वैसे मैं कोई जाऊँ क्या उसे कॉल करने, किसके पास टाइम पड़ी है इतनी ...
                   
मैंने कहा वो तो आपकी बात सही है मगर ट्रंप साहब क्या कह रहे थे ?
फेंकू चंद जी बोले अरे कुछ नहीं यार उसे मतीरे चाहिये थे उनको |  मैंने भी साफ़ चट्ट कह दिया कि अभी पासिबल नहीं है भई |
मैंने पूछा क्यों पोसिबल नहीं है फेंकू चंद जी ?
 वे बोले
अरे यार तुझे मालूम नहीं है ...मतीरे सप्लाई करने में मेरे सारे हवाई जहाज बीजी चल रहे है | उत्तर भारत में गमीं पड रही है टंकार, रोज की ४०-५० ट्रिपों से किसी तरह काम चलाता हूँ, अब इस बीच में हवाई जहाज को बाशीन्गटन भेजना पोसिबल नहीं है, और अभी तो रौळ में झौल और है |
                                                           
मैंने पूछा ऐसी कोनसी रौळ में झौल हो गई फेंकू चंद जी ?
उन्होंने कहा मेरे दो हवाई जहाज के तो सेल्फ स्टार्टर खराब हुए पड़े है | अब १५० लोग धक्का लगाते है तो पायलेट खट्ट से फस्ट गीयर में हवाई जहाज को डाल के उड़ा ले जाता है | अमरीका भेज दिया उसको तो फिर वहाँ से रिटर्न होने के लिए धक्का कौन लगाएगा ? ....
बहुत सारे लोचे होते हैं इस मतीरे के एयर सप्लाई के धंदे में |
जितने में फेंकू चंद जी बोले अरे टाइम क्या हो गया है यार, मुझे तो जाना है ?
मैंने कहा क्यूँ आपके पास इतने हवाई जहाज है तो आपके पास एक हाथ की घड़ी नहीं है ?

ये सुनते ही फेंकू चंद जी ने अपनी मोटर साइकिल स्टार्ट की और रवाना होने लगे ...लेकिन रवाना होते होते बोले .....अरे मेरे पास तो सोने के डायल वाली घड़ी है जिसमे १,२,३ ४, जंहा लिखे होते हैं वहाँ हीरे लगे है, अब उसका पट्टा चांदी का बनवाने दिया हुआ है ..उसी को लेने सुनारों की घाटी जा रहा हूँ यार .....और फेंकू चंद जी मंद मंद मुस्कुराते हुए ढर्रर्रर्र से निकल गए |

के.बी.व्यास 

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